अधिष्ठाता संदेश
भाषा मानव सभ्यता की आत्मा के साथ-साथ मानवीय संवेदना, सामाजिक सद्भाव एवं सांस्कृतिक मूल्य की संवाहिका है। यह किसी भी समाज के लिए केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं, बल्कि उस समाज के लिए आत्मगौरव का प्रतीक भी है। सत्य तो यह है कि इस नसर्गिक सृष्टि में भाषा मनुष्य समाज के लिए एक विशेष वरदान है। अगर भाषा नहीं होती तो सम्पूर्ण संसार चेतना शून्य होता। यह स्वीकार्य है कि प्राणी के अमूर्त भाव को भाषा ही मूर्त रूप प्रदान करती है, अतः ईश्वरीय वरदान के स्वरूप प्राप्त इस भाषा पुष्प का संरक्षण और संवर्धन हम सभी का परम कर्तव्य है। मनुष्य के बौद्धिक विकास में भाषा का योगदान स्तुत्य है और भारत जैसे बहुभाषी राष्ट्र में भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन में किए जा रहे प्रयास बहुत ही प्रशंसनीय है। इसे ध्यान में रखकर शैक्षणिक संस्थानों खासकर विश्वविद्यालय स्तर पर स्थापित भाषा संकाय का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषाई एवं साहित्यिक ज्ञान प्रदान करने के साथ-साथ उनमें सृजनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन, अनुसंधान क्षमता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना है। हमारा संकाय अंग्रेज़ी, हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं, साहित्य, भाषा-विज्ञान, अनुवाद अध्ययन तथा सांस्कृतिक विमर्श के विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट शिक्षण एवं शोध के लिए प्रतिबद्ध है। अनुभवी शिक्षकों, समृद्ध पुस्तकालय संसाधनों तथा शोधोन्मुख वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। संकाय निरंतर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप नवाचार, बहुविषयक अध्ययन एवं वैश्विक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित कर रहा है। वर्तमान के इस डिजिटल युग में वैश्विक स्तर पर भाषाओं का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। साथ ही वैज्ञानिक तथा तकनीकी विकास के कारण सम्पूर्ण दुनिया एव ग्लोबल विलेज बन चुकी है। वर्तमान में बढ़ रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मांग के कारण संचार, मीडिया, अनुवाद, प्रकाशन, प्रशासन, शिक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्रों में भाषा विशेषज्ञों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। हमारे संकाय का प्रयास चाहे अंग्रेजी में हो या हिन्दी में, विद्यार्थियों को ऐसे ज्ञान, कौशल एवं मूल्यों से संपन्न करना है, जो उन्हें व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ एक संवेदनशील एवं जागरूक नागरिक बनने में सहायता प्रदान करना है। एतद् सहित भारतीय ज्ञान संपदा को अक्षुण्ण रखते हुए विद्यार्थी एवं शोधार्थियों में राष्ट्रीयता की भावना को बनाए रखने का भी श्लाघनीय प्रयास जारी है। भाषा संकाय की शैक्षणिक उपलब्धियाँ, शोध-कार्य, साहित्यिक गतिविधियाँ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम इसकी समृद्ध परंपरा और उत्कृष्टता के प्रमाण हैं। मुझे विश्वास है कि हमारे विद्यार्थी और शोधार्थी अपने समर्पण, परिश्रम एवं नवाचारी दृष्टिकोण से नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेंगे तथा विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत को और समृद्ध करेंगे। मैं संकाय के सभी सुधी शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं पूर्व छात्रों के योगदान की सराहना करता हूँ और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
सादर
प्रो. भारत भूषण
अधिष्ठाता, भाषा संकाय
प्रो. भारत भूषण
Dean, School of Languages